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भारत के इस शहर में धूमधाम से मनाई गई बूढ़ी दीवाली

Publish Date: November 20 2017 01:07:10pm

मंडी/अजय शर्मा: मंडी जिला करसोग के पर्वतीय क्षेत्रों के देव मंदिरों मे आज के आधुनिक युग में भी परंपरागत देव संस्कृति के प्रत्यक्ष दर्शन होते हैं। करसोग के संस्कृति मर्मज्ञ डॉक्टर जगदीश शर्मा का कहना है कि यूं तो करसोग उपमंडल के तहत 15 देव कोठियों में बूढ़ी दीवाली का आयोजन होता है। लेकिन सोमाकोठी की बूढ़ी दीवाली में बूढ़ी दीवाली की काव गाथाओं के साथ पारंपरिक नृत्यों समुद्र मंथन, राक्षसों द्वारा परसुराम जी के तप भंग करने के लिए किए जाने वाला कराहलटू नृत्य,मशालों के साथ दिग्बंधन रूपी देरच, ढोल नृत्य व आनंद विभोर देवरथों के नृत्य के जो दर्शन सोमाकोठी की दीवाली में होते हैं वो कहीं नहीं होते। 

देव धुनो के साथ बुद्धि सिंह, लीपा राम,महेंद्र कुमार, तेजराम आदि द्वारा गाए जाने वाले पारंपरिक गीत ही सोमाकोठी की दीवाली को अलग पहचान प्रदान करते हैं। बूढ़ी दीवाली का यह सामूहिक वार्षिक पर्व ठाकूर ठाणा पंचायत वासियों की इन तीनों देवताओं के प्रति असीम आस्था का प्रतीक है। बूढ़ी दीवाली के इस पारंपरिक उत्सव में इन तीनों देव रथों की हार के हर परिवार के किसी न किसी सदस्य को जरूर भाग लेना पड़ता है। सदस्य जहां शुक्रवार की पूरी रात्रि में कोठी के आंगन मे शुभ मुहूर्त में जलाए अलाव के चारों ओर खड़े होकर पौराणिक आ यानों के काव गीतों के साथ.साथ दयाड़ी हसो करो बोलो दयाडियो स्वर गूंजते रहे। वही शनिवार को देर शाम तक दयाउड़ी मेले में सीमावर्ती पड़ती पंचायतों के लोग भी अपनी पारंपरिक पोशाकों में सुसज्जित होकर इस दो दिवसीय उत्सव की शान बढ़ाते हैं। 

himachal बूढ़ी दीवाली के लिए चित्र परिणाम

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