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लव-जिहाद का सच

Publish Date: November 22 2017 11:06:53am

लव जिहाद का मुद्दा चर्चा में बना ही रहता है क्योंकि यह किसी राज्य, क्षेत्र या देश का मामला नहीं है बल्कि यह एक विश्वव्यापी मुद्दा है। जहाँ पर भी मुस्लिम समाज अल्पसंख्यक है वहाँ की बहुसंख्यक आबादी अक्सर यह आरोप लगाती रहती है कि मुस्लिम युवक हमारी बेटियों को बहकाकर विवाह कर लेते हैं, फिर उनका धर्मपरिवर्तन करके उन्हें अपने धर्म में शामिल कर लेते हैं। जहाँ मुस्लिम बहुसंख्यक है वहाँ लव-जिहाद के मुद्दे को उठाने की हिम्मत कोई कर ही नहीं सकता इसलिये यह मुद्दा मुस्लिम अल्पसंख्यक आबादी वाले देशों का ही है। 

बर्मा की वर्तमान रोहिंग्या समस्या के पीछे भी लव जिहाद की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। बौद्ध नेता अशीन विराथू का आरोप है कि मुस्लिम युवक उनकी लड़कियों को अपने प्रेमजाल में फँसाकर शादियाँ कर लेते हैं और ज्यादा बच्चे पैदा करके आबादी बढ़ाकर जनसंख्या संतुलन बिगाड़ रहे हैं। बौद्ध समाज को सारी दुनिया में सबसे अहिंसक और शान्त स्वभाव का माना जाता है लेकिन यही समाज बर्मा में विराथू के नेतृत्व में रोहिंग्याओं के खिलाफ हिंसक हमले कर रहा है। यूरोप में भी कट्टरवादी ईसाई संगठन मुस्लिमों पर कुछ ऐसा ही आरोप लगा रहे हैं। लव-जिहाद सिर्फ भारत में प्रचलित शब्द नहीं है। यह किसी न किसी रूप में सारी दुनिया में देखने को मिल रहा है।

देखा जाये तो लव जिहाद अपने आप में सही शब्द नहीं है क्योंकि जहाँ जिहाद होता है वहाँ लव के लिये कोई जगह नहीं होती और जहाँ लव होता है वहां जिहाद की कोई जरूरत ही नहीं है। इस्लामिक धारणा के अनुसार जिहाद पवित्र शब्द हो सकता है लेकिन वर्तमान में जिहाद का मतलब मासूम और निर्दोष महिलाओं, पुरूषों और बच्चों का शोषण-उत्पीडऩ तथा बर्बर हत्याएँ करना ही है। दुनिया भर में इस्लाम फैलाने के लिये दनदनाते घूम रहे आतंकवादी मासूम लोगों की हत्याएं जिहाद के नाम पर ही कर रहे हैं। अमेरिका में हुआ लोन वुल्फ हमला करने वाला आतंकवादी अल्लाह-हू-अकबर का नारा लगाकर मासूम बच्चों को अपने ट्रक से कुचल रहा था। 

इसी जिहाद का एक हिस्सा है लव जिहाद। भारत में इसे हिंदू संगठनों का बेमतलब का हो हल्ला करार दिया जाता है जबकि सच यह है कि इससे कहीं पहले यूरोप में लड़कियों ने यह मामला उठाया है कि उन्हें गलत तरीके से फँसाकर शादियाँ की गई हैं और उसके बाद उनका जबरन धर्म-परिवर्तन किया गया है। अक्सर इसे हल्के में लिया जाता है और कहा जाता है कि ये कोरी बकवास है जबकि मेरा मानना है कि सच से आँखें चुराने से सच झूठ नहीं हो जाता है। लव-जिहाद एक ऐसा सच है जिससे इन्कार करना मूर्खता ही होगी लेकिन यह भी एक सच है कि हिंदू-मुस्लिम युवक और युवतियों के बीच होने वाले सारे प्रेम-विवाहों को लव-जिहाद का नाम नहीं दिया जा सकता। एक सच यह भी है कि कौन सा प्रेम विवाह लव-जिहाद नहीं है, इसकी पहचान करना भी मुश्किल है। 

पिछले दिनों दिल्ली में एक हिंदू लड़की के घर से भागने का समाचार मिला और बाद में पता लगा कि उसने किसी मुस्लिम युवक से शादी कर ली है। शादी के कुछ महीनों बाद लड़की अपने पति के साथ अपने परिवार से मिलने घर आई तो पता लगा कि वह पूरी तरह से बदल चुकी थी। उसने मुस्लिम धर्म अपना लिया था तथा बुरके में लिपटी हुई अपने घर आई थी। एक आधुनिक सोच वाली लड़की का इस तरह से बुरके में छुप जाना किसी को अच्छा नहीं लगा था लेकिन किसी ने कुछ नहीं कहा। बाद में लड़की किसी भी पारिवारिक समारोह में शामिल नहीं हुई, न ही उसे अकेला मायके में आने दिया गया। देखा जाये तो शादी के बाद न केवल धर्म बल्कि उससे उसका पूरा परिवार और समाज ही छीन लिया गया था। बड़ा अजीब लगता है यह सोचकर कि उस लड़की के पास नया परिवार तो था लेकिन पुराने सारे सम्बन्ध लगभग तोड़ दिये गये थे जबकि लड़कीवालों ने शादी को स्वीकार कर लिया था। इसे लव-जिहाद नहीं कहा जा सकता क्योंकि लड़की ने ऐसी कोई शिकायत अपने घर वालों से नहीं की थी लेकिन अब सवाल उठता है कि लड़की ही धर्म परिवर्तन क्यों करे। सारा झगड़ा इसी बात को लेकर है कि ऐसे मामलों में शादी के तुरन्त बाद लड़की का धर्म परिवर्तन करा दिया जाता है। चाहे यह धर्म परिवर्तन दबाव डालकर कराया जाता है लेकिन जब तक लड़की शिकायत नहीं करती, तब तक इसे कैसे साबित किया जा सकता है कि यह जबरन धर्म परिवर्तन का मामला है। लड़कियाँ बहुत कम मामलों में शिकायत करती है क्योंकि शादी के बाद जब वो पति का घर और नाम स्वीकार कर लेती है तो थोड़ी सी आनाकानी करने के बाद धर्म भी स्वीकार कर लेती है। लव जिहाद पर ज्यादा हल्ला तब मचाया जाता है जब लड़का अपना धर्म छुपाकर लड़की से शादी कर लेता है और बाद में अपना सच बताकर लड़की को धर्मपरिवर्तन के लिये मजबूर करता है। ऐसे कम ही मामले सामने आये हैं। ज्यादातर मामलों में लड़कियों को लड़को का धर्म पता होता है। मेरा मानना है कि हिंदू युवतियों को ऐसे प्रेम विवाहों में मुस्लिम युवकों से धर्मपरिवर्तन की शर्त रखनी चाहिये। अगर मुस्लिम युवक सच में इन लड़कियों से प्यार करते होंगे तो वो हिंदू धर्म स्वीकार कर लेंगे। अगर वो ऐसा करने से इन्कार करते हैं तो हिंदू लड़कियों को अपने प्रेम सम्बन्धों से किनारा कर लेना चाहिये। 

अगर मुस्लिम युवकों को धर्म ज्यादा प्यारा है तो उन्हें हिंदू लड़कियों से दूर रहना चाहिये। हिंदू संगठन भी इसलिये इन प्रेम विवाहों के खिलाफ है कि इस तरह से हिंदुओं की आबादी कम करने का प्रयास चल रहा है। केरल में ऐसे कई संगठन है जो सुनियोजित तरीके से धर्म परिवर्तन करवा रहे हैं और लव-जिहाद भी इसमें से एक तरीका है जिससे इस्लाम धर्म में लोगों को परिवर्तित किया जा रहा है। किसी भी व्यक्ति को लालच देकर या धमकाकर धर्म परिवर्तन कराना कानूनी रूप से भी गलत है और धार्मिक रूप से भी। मुस्लिम विद्वान भी यह कहते हैं कि किसी भी गलत तरीके से धर्मपरिवर्तन उचित नहीं है।

अन्त में यही कहा जा सकता है कि लव-जिहाद के बेहद कम मामले हैं लेकिन फिर भी यह चिन्ता का विषय है क्योंकि चाहे कितने ही कम मामले क्यों न हो लेकिन इनसे दोनों समुदायों के बीच नफरत की दीवार खड़ी हो रही है। मुस्लिम समाज को आगे आकर ऐसे मामलों का विरोध करना चाहिये और ऐसे मुस्लिम संगठनों की गतिविधियों के बारे में सरकार को सूचना उपलब्ध करवानी चाहिये। हिंदू मुस्लिम भाईचारे को चोट पहुँचाकर थोड़े से लोगों का धर्म परिवर्तन कराना कोई उपलब्धि नहीं है। इस देश का भविष्य हिंदू-मुस्लिम समाज के प्रेम और विश्वास पर टिका हुआ है लेकिन कुछ लोग इसे सुनियोजित तरीके से चोट पहुँचा रहे हैं। उदारवादी और सही सोच के मुस्लिमों की चुप्पी के कारण सारे विश्व में इस्लाम बदनाम हो रहा है।आतंकवादी और कट्टरवादी मुस्लिमों के कारण आज पूरे विश्व में मुसलमानों को शक की नजर से देखा जा रहा है। यही समय है जब मुस्लिम समाज को गलत को गलत कहना सीखना होगा। दूसरे धर्म के व्यक्ति से प्रेम और विवाह हिम्मत का काम है लेकिन कुछ लोगों के कारण ऐसे व्यक्ति शक के घेरे में रहते हैं। सबसे जरूरी बात यह है कि प्रेम में सारा त्याग महिलाओं से नहीं माँगा जाना चाहिये। यदि किसी हिंदू या मुस्लिम युवक को दूसरे धर्म की युवती से प्रेम होता है तो उसे अपना धर्म बदलकर युवती का धर्म स्वीकार करना चाहिये। तभी ये साबित हो पायेगा कि उसका प्रेम सच्चा है। सच्चा प्रेम त्याग नहीं माँगता बल्कि त्याग करता है। जब युवक अपना धर्म प्रेम के लिये छोडऩे की हिम्मत दिखायेंगे, तब पता चलेगा कि उनका समाज उनके साथ कैसा व्यवहार करता है ?  

सीमा पासी, लेखक 

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