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मुखौटा कंपनियांं

Publish Date: November 22 2017 11:11:43am

नोटबंदी के बाद जिन मुखौटा कंपनियों पर आयकर विभाग ने शिकंजा कसना शुरू किया था, उनमें से अधिकतर गुजरात के सूरत में ही रजिस्टर्ड हैं। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री ने स्वयं घोषणा कर कहा था कि देश में 2 लाख से अधिक मुखौटा कंपनियां हैं जिन का काम काले धन को सफेद करना ही है। आयकर विभाग द्वारा जारी दूसरी सूची में 80 प्रतिशत कंपनियों का मुख्यालय सूरत में है। आयकर अधिकारियों द्वारा दूसरी सूची में 2138 कंपनियों का नाम है। इन कंपनियों ने नोटबंदी के दौरान 5000 करोड़ रुपए की अघोषित नकदी जमा कराई थी। उपरोक्त सूची उन 5000 मुखोटा कंपनियों का हिस्सा है। जिन्होंने नोटबंदी के दौरान जीरो बैलेंस खातों में 17000 करोड़ रुपया जमा कराया और करीब इतनी ही रकम निकाल भी ली। 'नोटबंदी के बाद मुखौटा कंपनियों की असलियत सामने आने के बाद आयकर विभाग ने इन कंपनियों पर शिकंजा कसना शुरू किया था। कर अधिकारियों के मुताबिक नई सूची में 2,138 मुखौटा कंपनियों के नाम हैं जिनमें से 80 फीसदी से अधिक का संबंध सूरत से है।

इन कंपनियों ने नोटबंदी के दौरान कम से कम 5,000 करोड़ रुपये की अघोषित नकदी जमा कराई थी। विभाग को उम्मीद है कि यह आंकड़ा अभी और ऊपर जा सकता है। यह सूची उन 5,800 मुखौटा कंपनियों का हिस्सा है जिन्हें वित्त मंत्रालय ने छांटा है। इन कंपनियों ने नोटबंदी के बाद करीब जीरो बैलेंस खातों में 17,000 करोड़ रुपये जमा कराए थे और फिर करीब इतनी ही रकम निकाल ली थी। पहले काले धन को सफेद बनाने का तरीका यह होता था कि सूचीबद्घ मुखौटा कंपनियों के शेयर खरीदे जाते थे, कीमतों को बढ़ाया जाता था और एक साल बाद शेयर बेच दिए जाते थे और दीर्घकालिक पूंजी लाभ पर छूट का दावा किया जाता था। लेकिन नए मामलों में मुखौटा कंपनियां लेनदेन की ऐसी-ऐसी रणनीति अपना रहीं हैं जिन्हें पकड़ पाना मुश्किल है। कर विभाग के अधिकारी ने कहा कि इस तरह की एक व्यवस्था को लेयरिंग कहते हैं जिसमें सूरत के ऑपरेटरों को महारत हासिल है। मुखौटा कंपनियों के मामले में शायद ही कभी संपत्तियां लाभार्थी के नाम पर होती हैं और पैसा उस क्षेत्र में घूमता है जहां भारतीय कानून की पहुंच नहीं होती है।

आयकर अधिकारी अनुसार हाल में कई ऐसे मामलों का पता चला है जहां प्रवर्तकों ने विदेशी खातों में पैसों को ठिकाने लगाया। ये खाते सूरत की कुछ कंपनियों से जुड़े थे। फिलहाल इस मामले की जांच की जा रही है। काले धन पर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मुखौटा कंपनियों का पता लगाने और शेयर बाजारों का दुरुपयोग रोकने के लिए व्यवस्था बनाने की सिफारिश की थी। इसके बाद सरकार ने इन कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करने का फैसला किया था। पिछले तीन साल में कर विभाग ने 1,155 मुखौटा कंपनियों की पहचान की है जिनके जरिये 22,000 से अधिक लोगों ने 13,300 करोड़ रुपये से अधिक का काला धन सफेद कराया। विभाग ने अब तक 47 लोगों के खिलाफ आपराधिक मामला शुरू किया है। इस बीच विभाग ने मुखौटा कंपनियों की मदद करने में शामिल चार्टर्ड अकाउंटेंटों के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू की है।Ó 2 लाख मुखौटा कंपनियों का पता लगाने वाली सरकार और उसका आयकर विभाग अभी तक उपरोक्त 2 लाख में से मात्र 5000 कंपनियों की छानबीन कर पाई है इससे स्पष्ट है कि 2 लाख मुखौटा कंपनियों की छानबीन करने के लिए अभी तो सरकार के पास उच्च अधिकारी ही नहीं। इस कारण छानबीन को काफी समय लगेगा। दूसरा न्यायिक प्रक्रिया भी फर्जी कंपनियों पर शिकंजा डालने में एक बाधा ही मानी जाएगी। देश में एक नहीं अनेक ऐसे कानून हैं जो मुकद्दमे को लटकाने के लिए सहायक हो जाते हैं। केंद्र सरकार को चाहिए कि आयकर विभाग के रिक्त स्थानों की जल्द पूर्ति करे ताकि जन साधारण के सामने मुखौटा कंपनियों का सत्य सामने आये।देश आर्थिक विकास की राह पर तभी आगे बढ़ सकेगा जब मुखौटा कंपनियों पर नकेल कसी जाएगी। सरकार अपनी प्रक्रिया में तेजी लाएगी तभी मुखौटा कंपनियों का बदरंगी चेहरा सामने आएगा और जन साधारण को आर्थिक सुधारों का लाभ मिलेगा।


-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।

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