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HPBL घोटाले में बड़े अधिकारियों का गिरेबान पकड़ सकती है पुलिस, FIR के आठ माह बाद पहली गिरफ्तारी

Publish Date: November 27 2017 07:54:39pm

बद्दी (राकेश धीमान, रणेश राणा): प्रदेश में शराब करोबार पर नियंत्रण को बनी एचपीबीएल के पहले ही साल हुए 3.22 करोड़ रूपये के घोटाले की गाज आबकारी विभाग के बड़े अधिकारियों पर भी गिर सकती है। पुलिस ने मामले में 27 मार्च 2017 को दर्ज एफआईआर के आठ माह बाद एचपीबीएल के बद्दी स्थित डिपो के सहायक डिपो प्रबंधक ईटीआई अंकुश चौहान को सोलन उनके निवास स्थान से गिरफ्तार किया था। पुलिस की ओर से मामले में यह पहली गिर तारी हुई है। बताया जा रहा है कि पुलिस जल्द ही मामले में आबकारी विभाग के बड़े अधिकारियों को भी थाने बुला सकती है। मामले में 11 शराब कारोबारियों को भी पुलिस की ओर से विभाग के शिकायत पत्र आरोपी बनाया गया है। पुलिस हालांकि इन कारोबारियों को अभी गिरफ्तार नहीं कर पाई है। गौरतलब है कि पुलिस थाना बरोटीवाला में आबकारी विभाग के उच्च पदस्त अधिकारी की शिकायत के बाद 27 मार्च को आईपीसी की धारा 409, 420 व 120बी के तहत एफआईआर को दर्ज किया गया। मामले में सवाल यह उठा रहा है कि क्या केवल एक ईटीआई इस प्रकार तीन करोड़ के घोटाले को शराब कारोबारियों के साथ मिलकर अंजाम दे सकता है। पुलिस को भी मामले में कुछ ओर विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत का अंदेशा है। जिस पर पुलिस की ओर से जांच जारी है।

आखिर कहां से आई एडवांस पेमेंट की फर्जी रसीदें
सूत्रों के अनुसार गिर तार किए गए ईटीआई को ठेकेदारों द्वारा एडवांस पेमेंट की रसीदें दिखाई गई। जिसके आधार पर अधिकारी ने ठेकेदारों को 3.22 करोड़ रूपये की शराब दे डाली। पुलिस के अनुसार आबकारी विभाग के लोगों व शराब कारोबारियों की मिलीभगत से ही यह फर्जीवाड़ा अंजाम दिया गया है। पुलिस की ओर से हालांकि मामले में मीडिया के साथ अधिक जानकारी को साझा नहीं किया जा रहा है ताकि आरोप सबूत नष्ट न कर सकें। अनुमान है कि जल्द ही पुलिस मामले में कोई बड़ी गिरफतारी के साथ नया खुलासा कर सकती है।

ईटीओ पद पर कैसे किया गया ईटीआई को तैनात
जांच का विषय है कि करोड़ों के शराब कारोबार के लिए सरकार द्वारा तैयार एचपीबीएल की फर्म में डिपो इंचार्ज के लिए ईटीओ स्तर के अधिकारी की तैनाती को सुनिश्चित किया गया। ऐसे में आरोपी ईटीओ को बिना योगयता के भी विभाग द्वारा कैसे डेप्यूटेशन पर डिपो में तैनाती दी गई। मामले में राजनैतिक पहलू को लेकर भी पुलिस की जांच होना लाजमी लग रहा है।

नौ माह क्यों चुप बैठा रहा विभाग
बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि कारोबारियों को करोड़ों की शराब जुलाई 2016 से मार्च 2017 तक बंटती रही। विभाग के बड़े अधिकारियों को इस लेन-देन की भनक क्यों नहीं लगी या फिर अधिकारियों ने आरोपी को बचाने का प्रयास इस दौरान किया।

अधिकारियों-कारोबारियों से भी पूछताछ: डीएसपी
डीएसपी पुलिस जिला बद्दी राहुल शर्मा ने कहा कि एचपीबीएल के 3.22 करोड़ मामले में पहली गिरफ्तारी कर ली गई है। आरोपी ईटीआई की गिरफ्तारी के बाद अब मामले से जूड़े दूसरे आरोपियों से पूछताछ व अधिकारियों से भी जवाब तलब किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अब 2.50 करोड़ रूपये शराब ठेकेदारों की ओर से हिमाचल प्रदेश बेब्रेज लिमिटिड को देना शेष है।

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