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एनजीटी के फैसले से खतरे में शिमला स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट 

Publish Date: November 29 2017 11:22:15am

शिमला/ऊषा शर्मा: राजधानी शिमला में भवन निर्माण को लेकर एनजीटी के आदेश व्यवहारिक नहीं हैं। इससे यहां के कोर एरिया में निर्माण कार्य पर प्रतिबंध लग जाएगा, जिससे स्मार्ट सिटी की पूरी परियोजना खतरे में पड़ जाएगी, क्योंकि स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत राजधानी के कोर एरिया के कायाकल्प पर 1500 करोड़ रुपए खर्च करने का प्रावधान है। कोर एरिया शिमला शहर की लाइफ लाइन है और हजारों लोगों इसी क्षेत्र से रोजगार कर जीवन यापन करते हैं। एनजीटी के ताजा आदेशों से इस कोर एरिया में कोई निर्माण नहीं हो पाएगा। प्रदेश सरकार को एनजीटी के निर्णय के खिलाफ न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के साथ इस मामले को केंद्र से भी उठाना चाहिए।

ये बात शिमला नागरिक सभा के अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने आज यहां एक पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए कही। मेहरा ने कहा कि एनजीटी के इस फैसले के खिलाफ सभा 2 दिसंबर को आगामी रणनीति बनाने के लिए कालीबाड़ी सभागार में एक अधिवेशन करने जा रही है, जिसमें सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, एनजीओ, नगर निगम शिमला के महापौर, उप महापौर व पार्षदों तथा अन्य लोगों को बुलाया गया है। विजेंद्र मेहरा ने कहा कि इस निर्णय से शिमला में विकास का क्रम थम जाएगा तथा शहर में वह स्थिति पैदा हो जाएगी जब यहां पर जंगल थे तथा इंसान नहीं थे। 

साथ ही इससे स्मार्ट सिटी प्रोजैक्ट पर भी खतरा पैदा हो गया है, क्योंकि इस प्रोजैक्ट में शहर के कोर ऐरिया में 1500 करोड़ रूपए खर्च होने है तथा यह राशि पुनरूनिर्माण के लिए दी जा रही है। उन्होंने कहा कि इस फैसले से शहर में पेड़ों के कटान पर रोक होगी, लेकिन वैज्ञानिकों के अनुसार पुराने पेड़ कटने चाहिए तथा नए पेड़ लगाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि शिमला में नजर रखने के लिए जो कमेटी एनजीटी ने बनाई है, उसमें शिमला से किसी को भी शामिल नहीं किया गया है। इससे  नगर निगम व शहर के लोगों को बाहर रखा गया है। उन्होंने कहा कि नागरिक सभा इस फैसले के खिलाफ कानूनी तथा जनता के साथ लड़ाई लड़ेगी। इसके लिए 2 अक्तूबर को कालीबाड़ी सभागार शिमला में एक अधिवेशन रखा गया है, जिसमें सभी लोग अपनी-अपनी राय दे सकते हैं। इसके अलावा शहर के लोगों के हितों की रक्षा करना सरकार की भी जि मेवारी है। इसलिए सरकार को जहां न्यायालय की शरण लेनी चाहिए तो वहीं इस मामले को केंद्र सरकार से भी उठाना चाहिए।

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