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एक मुट्ठी अनाज

Publish Date: November 30 2017 12:22:43pm

अमृतसर में एक मुट्ठी अनाज योजना का आरंभ करते हुए विश्व हिन्दू परिषद् के महासचिव डा. प्रवीण तोगडिय़ा ने कहा कि देश में रोजाना 19 करोड़ लोग खाली पेट सो जाते हैं। यह कार्यक्रम उन लोगों के लिए हैं, जिन्हें भरपेट खाना नहीं मिलता। तोगडिय़ा अनुसार एक मुट्ठी अनाज हर हिन्दू के घर में प्रतिदिन इकट्ठा किया जाएगा और एकादशी के दिन उसे गरीब परिवारों में बांट दिया जाएगा। हर हिन्दू के घर में दस किलो की थैली दी जाएगी, जहां रोजाना एक मुट्ठी अनाज डाला जाएगा जो प्रत्येक एकादशी के दिन 1 लाख लोगों में बांट दिया जाएगा।

विश्व हिन्दू परिषद् द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर शुरू की गई एक मुट्ठी अनाज के दान की योजना स्वागत योग्य है। विश्व हिन्दू परिषद् इसके लिए बधाई की पात्र है। डा. तोगडिय़ा ने जो कहा वह ठीक है, देश में 19 करोड़ लोग जब खाली पेट सोने को मजबूर हैं तो यह स्थिति हमारी व्यवस्था पर ही प्रश्न चिन्ह लगा देती है। आज हम आकाश से पाताल तक पहुंचने के दावे कर रहे हैं। विश्व की पहली पांच शक्तियों को चुनौती दे रहे हैं। भारत के बढ़ते कदमों को विश्व मान्यता दे रहा है लेकिन जब 19 करोड़ लोगों के भूखे सोने का तथ्य सामने आता है तो भारत की सब उपलब्धियां छोटी लगने लगती हैं। भारत में अनाज की कोई कमी नहीं है। लाखों-करोड़ों टन अनाज गौदामों में पड़ा गल रहा है। लेकिन उपरोक्त अनाज को भूखे के पेट तक ले जाने में हम आज भी असफल हैं।

अनाज को पैदा करने वाला किसान भी आर्थिक दबाव में है और आत्महत्या करने को मजबूर है। आत्महत्या समस्या का हल नहीं है। समस्या का समाधान तो वितरण प्रणाली को मजबूत करने व गौदामों में पड़े अनाज को बचाने व लोगों तक पहुंचाने की है। पत्रकारों से बातचीत करते हुए डा. तोगडिय़ा ने कहा कि '17 वर्षों में तीन लाख किसानों ने देश में आत्महत्या की है। इनके पीछे सरकारें जिम्मेदार हैं। किसान खेती से पीछे हटने लगा है। उन्हें जो दाम मिलता है उससे उनकी लागत ही नहीं पूरी होती है। खाद के दाम आसमां छू रहे हैं। किसानों पर दो लाख करोड़ का कर्ज है जबकि मुट्ठी भर (50) उद्योगपतियों को कितना फायदा मिल रहा है, यह सभी जानते हैं। आखिर एक देश में दो नीति क्यों है। तोगडिय़ा से जब यह पूछा गया कि अयोध्या में राममंदिर के निर्माण के लिए घर-घर से ईंट मांगने वाले प्रवीण तोगडिय़ा व विनय कटियार जैसे हिन्दू धर्म की आवाज बनने वाले 1992 के बाद धीरे-धीरे पीछे होने लगे, दो सीटों वाली भाजपा आज केंद्र सरकार व उत्तर प्रदेश में पूर्ण बहुमत से है। इस पर उन्होंने हंसते हुए कहा कि राजनीति में कभी नहीं था। मेरा केवल यही मकसद है कि राम को मंदिर मिले और देश को रामराज्य। तोगडिय़ा ने कहा कि राजनीति जो करे वो करे वह तो चाहते हैं कि प्रभु रामलला की मूर्तियां टाट से हटाकर भव्य मंदिर में स्थापित हों।'

डा. तोगडिय़ा ने कहा कि 'देश कर्ज और समाज भ्रष्टाचार मुक्त हो तभी राम राज्य की स्थापना हो सकती है। विश्व हिन्दू परिषद् ही नहीं देश की जनता राम के लिए अयोध्या में मंदिर मांग रही है और समाज के लिए राम राज्य। मैं चाहता हूं कि एक सप्ताह में ही राम मंदिर का काम शुरू हो जाए। कैसी विडंबना है कि राम जिन्हें हम भगवान मानते हैं वो झोपड़ पट्टी में रह रहे हैं। राम मंदिर बनना ही चाहिए, विश्व हिन्दू परिषद जब तक राम मंदिर नहीं बन जाता, संघर्ष करती रहेगी।'

एक मुट्ठी अनाज की परम्परा नई नहीं है, अतीत में जाएं तो पायेंगे कि हिन्दू के घर जीव जन्तुओं के लिए प्रति दिन आटा का एक पेड़ा रखा जाता था, उसी परम्परा को पुन: जीवित करने का प्रयास ही है एक मुट्ठी अनाज। महर्षि वेद व्यास ने धर्म को परिभाषित करते हुए कहा था कि परमार्थ ही धर्म है। आज विश्व हिन्दू परिषद् परमार्थ की राह पर चलकर धर्म की ही सेवा कर रही है। हिंसा द्वारा धर्म का प्रचार व प्रसार करने के सिद्धांत को हिन्दू धर्म ने कभी मान्यता नहीं दी है। विवेक व तर्क को आधार बनाकर ही हमारे ऋषियों-मुनियों, संतो तथा बुद्धिजीवियों ने हिन्दू धर्म का प्रचार किया है। धर्म को आधार बनाकर भारत पर हमले हुए हैं, लेकिन भारत ने कभी भी हिंसा के बल पर धर्म प्रचार नहीं किया।
विश्व हिन्दू परिषद् ने जिस तरह खाली पेट के लिए भोजन के प्रबंध की योजना शुरू की है ऐसे ही शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी सेवा कार्य शुरू करे ताकि शिक्षित व स्वस्थ समाज की नींव रखी जा सके, जो हमारी भावी पीढिय़ों के विकास में बहुत सहायक सिद्ध होगी।

उपरोक्त परमार्थ की राह पर चलकर हिन्दू समाज मजबूत भी होगा और एक-दूसरे के नजदीक भी आयेगा। विश्व स्तर पर तथा राष्ट्रीय स्तर पर हिन्दुओं को मिल रही चुनौतियों को देखते हुए एक मानसिक व शारीरिक रूप से मजबूत हिन्दू समाज की आवश्यकता है। विश्व हिन्दू परिषद् के डा. तोगडिय़ा व एक मुट्ठी अनाज से जुड़े सभी राष्ट्रीय व प्रदेश स्तर के नेताओं व कार्यकर्ता को भी बधाई। इस योजना की सफलता विश्व हिन्दू परिषद् की छवि व साख दोनों को बहुत मजबूत करेगी तथा समाज को एक नई दिशा भी देगी।
एक मुट्ठी अनाज योजना से जुड़े लोगों को पुन: बधाई।


-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।

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