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टीम गांधी ने मदद की बजाय भटके युवक को भगाया

Publish Date: November 30 2017 01:26:58pm

ऊना (ममता भनोट) : बेसहारों का मसीहा कहा जाने वाली पुलिस के इन शब्दों का जिला ऊना से कोई लेना देना नहीं है। अगर कोई भूला भटका ऊना में पहुंच जाए, तो एसपी गांधी टीम बेसहारा की मदद करने की बजाय, उल्टा गालियां देने पर उतारू हो रहे हैं। ऐसा ही एक शख्स दिल्ली से भटकता हुआ ऊना शहर में पहुंच जाता है, लेकिन पुलिस मदद करने की बजाय गालियां देकर वापिस दिल्ली जाने ेकी धमकिया दे रही है। सोशल मीडिया पर युवक द्वारा द्वारा गई एक विडियो में पुलिस की जमकर फजीहत हो रही है।

विडियो में कहा गया है कि अगर ऐसा ही ऊना पुलिस करती रहेगी, तो बेसहारों को रक्षा कौन रहेगा।  बता दें कि मंगलवार को दिल्ली का 17 वर्षीय रिशव भटकता हुआ ऊना शहर में पहुंच गया था। पीजी कॉलेज समीप लवारिस हालत में देख युवक को स्थानीय दुकानदार ने पूछा, तो बताया कि भटकता हुआ दिल्ली से ऊना पहुंच गया हूं और मुझे दिल्ली जाना है। दुकानदार नवदीप राणा ने युवक को पहले खाना खिलाया और घर वालों के बारे पूछताछ की। युवक अपना पता दिल्ली के शहदरा बताकर बार-बार घर जाने की बात कहने लगा। इस पर नवदीप राणा ने इसकी सूचना एसपी ऑफिस ऊना को दी। एसपी ऑफिस द्वारा पुलिस थाना में सूचना देने की बात कही गई, जिस नवदीप ने पुलिस थाना में फोन कर बात बताई।

पुलिस थाना से नवदीप को सिटी चौकी फोन करने की बात कही गई। सिटी चौकी में फोन पर के करीब दो घंटे बाद दो पुलिस कर्मी मौके पर पहुंचे और दिल्ली के युवक देखकर भड़क उठे। नवदीप राणा ने बताया कि पुलिस कर्मियों ने युवक की मदद करने की बजाय गालिया निकालनी शुरू कर दी और ऊना छोड़ भाग जाने को कहा। पुलिस के इस बर्ताव से युवक की आंखों की आंसु भर आए और दुकानदार पुलिस कर्मियों की इस व्यवहार को देखकर हैरान हो गए। पुलिस द्वारा धमकाने के बाद युवक नंगल की ओर पैदल की निकल गया और पुलिस कर्मी भी जिम्मेवारी ने पल्ला छुड़ाते हुए वापिस चौकी लौट आए। अब सवाल यह है कि अगर ऊना की पुलिस भटके हुए हो राह नहीं दिखाएगी, तो समय का मरा व्यक्ति किस की शरण में जाएगी। नवदीप ने कुछ समय बाद युवक की फोटो व विडियो सोशल मीडिया पर डाल दी। नवदीप द्वारा फेसबुक में अपलोड की गई फोटो व विडियो के साथ शेम ऑन ऊना पुलिस भी लिखा है।  पुलिस कर्मियों द्वारा लगाई गई फटकार के बाद तो रिशव मौके से तो निकल गया, लेकिन इस वक्त रिशव कहां और किन हालातों में होगा, ये कोई नहीं जानता। सर्दी भरी रात रिशव ने कहां काटी होगी, इसका किसी को भी मालूम नहीं है। पीजी कॉलेज ऊना के समीप रेडीमेड कपड़े के व्यापारी नवदीप का कहना है कि बेहतर होता कि पुलिस को सूचित करने की बजाय खुद ही कुछ पैसे देकर रिशव को दिल्ली की बस में बिठा देता। पुलिस वालों ने ऐसा किया, जिसका मुझे कुछ दुख लगा है। उन्होंने पुलिस द्वारा उठाए गए इस कदम की भी निंदा की है। एएसपी दिनेश कुमार का कहना है कि ऐसा कोई भी मामला ध्यान में नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी की मदद करना पुलिस का फर्ज है। अगर किसी पुलिस कर्मी ने युवक की मदद नहीं की है, तो इसकी जांच की जाएगी। 

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