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महिला सशक्तिकरण

Publish Date: December 01 2017 01:23:01pm

गत दिनों हैदराबाद में वैश्विक उद्यमिता शिखर सम्मेलन में बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि देश के लिए महिला सशक्तिकरण काफी अहम है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में महिला को शक्ति का प्रतीक माना गया है। 'पीएम मोदी ने कहा कि सातवीं शताब्दी में दार्शनिक गार्गी हुई। रानी अहिल्याबाई होल्कर और रानी लक्ष्मीबाई ने अपनी जमीन बचाने के लिए बहादुरी से लड़ाइयां लड़ीं। भारत में महिलाओं का इतिहास काफी मजबूत रहा है। हमारे देश के मंगल अभियान जैसे अंतरिक्ष कार्यक्रम में महिलाओं की काफी अहम भूमिका रही है। कल्पना चावला और सुनीता विलियम्स दोनों ही भारतीय मूल की महिलाएं हैं जो अमेरिकी स्पेस मिशन का हिस्सा रही। हैदराबाद शहर में साइना नेहवाल, पीवी सिंधु और सानिया मिर्जा जैसी प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं। हम शहरी और ग्रामीण निकायों में एक तिहाई महिलाओं का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित कर रहे हैं। मोदी ने कहा कि लिज्जत पापड़ बनाने वाली महिलाएं कोऑपरेटिव संस्थाएं चलाकर इस काम को कर रही हैं। इस समिट में भी आधी से ज्यादा महिलाएं शामिल हैं।

भारत के विकास पथ पर बढ़ते कद और विश्व स्तर पर प्रत्येक क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने में मिल रही सफलता के पीछे भारत में महिला शक्ति का उभरना है। हाल ही में गुवाहाटी में हुई महिला मुक्केबाजी में भारत की सात लड़कियां फाईनल में पहुंची जिनमें पांच ने स्वर्ण पदक और दो ने कांस्य पदक जीता। इसी तरह चीन में आयोजित मिस वल्र्ड प्रतियोगिता में पहला स्थान भारतीय महिला को मिला। भारतोलन में भारतीय महिला खिलाड़ी ने गोल्ड मैडल जीता है। महिला कबड्डी, महिला हाकी में भारत विश्व चैम्पियन है। भारत के अतीत में जायें तो पायेंगे कि भारतीय संस्कृति में महिला और पुरुष को एक-दूसरे का पूरक माना गया है। भगवान शिव का अर्धनारीश्वर रूप इसी सिद्धांत को ही दर्शाता है। सदियों की गुलामी के कारण भारत में पर्दा प्रथा, सति प्रथा तथा बाल विवाह जैसी अन्य कुरीतियां पैदा हो गईं। आजादी के बाद भारत ने एक बार फिर महिला के महत्व को समझते हुए उसके सशक्तिकरण के लिए प्रयास शुरू किए, आज उन्हीं प्रयासों का नतीजा है कि प्रत्येक क्षेत्र में भारतीय महिलाएं अपनी छाप छोड़ रही हैं। लेकिन महिलाओं को अभी भी उनका बनता अधिकार सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक क्षेत्र में नहीं मिल पा रहा है। इसका मुख्य कारण तो अशिक्षा व गरीबी ही है। एक बड़े वर्ग की संर्कीण सोच भी एक बड़ा कारण है। 

महिला को पुरुष का प्रतिद्वंद्वी न समझकर जब सहयोगी समझना शुरू करेंगे तभी भारत स्थाई रूप में विश्व स्तर पर प्रत्येक क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने में सफल होगा। महिला केवल परिवार की नींव ही नहीं बल्कि समाज व देश की भी नींव होती है। नींव जितनी मजबूत होगी इमारत उतनी मजबूत होगी। एक शिक्षित, जागरुक और स्वस्थ महिला ही भारत को एक मजबूत आधार दे सकती है। सो महिला सशक्तिकरण महिला सहित परिवार, समाज और देश की भलाई में ही है। मजबूत भारत का आधार सशक्त महिला ही है।


-इरविन खन्ना, मुख्य संपादक, दैनिक उत्तम हिन्दू।

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