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दस हज़ार तकनीकी संस्थानों में शिक्षकों का होगा प्रशिक्षण

Publish Date: December 03 2017 11:22:39am

नयी दिल्ली(उत्तम हिन्दू न्यूज): देश में तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने की जरुरत को देखते हुये तकनीकी संस्थानों के शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जायेगा और दाखिला से पहले छात्रों के लिए विशेष शिविर लगाये जायेंगे। यह जानकारी अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआईसीटीई) के अध्यक्ष डॉ अनिल सहस्त्रबुद्धे ने यूनीवार्ता के साथ साक्षात्कार में दी। उन्होंने कहा की तीन साल पहले उनके अध्यक्ष पद का कार्यभार संभालने तक तकनीकी संस्थानों से पास होने वाले इंजीनीयरिंग छात्रों में से केवल बीस-पच्चीस प्रतिशत छात्र ही रोजगार के योग्य थे लेकिन अब गुणवत्ता पर अधिक ध्यान देने से उन छात्रों की संख्या बढ़कर चालीस प्रतिशत हो गयी है। ऐसा उद्योग जगत तथा अकादमिक जगत के बीच अधिक भागीदारी और औद्योगिक संस्थानों में छात्रों के प्रशिक्षण से संभव हो पाया है। अगले तीन सालों में करीब 60 प्रतिशत छात्रों को रोजगार के योग्य बनाया जायेगा।

उन्होंने बताया कि इन संस्थानों में 30-35 प्रतिशत शिक्षकों के पद खाली हैं जिन्हें भरने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही शिक्षा की गुणवत्ता बढाने के लिए हम शिक्षकों के लिए तीन माह का प्रशिक्षण शुरू करने जा रहे हैं । इसके लिए नए नियम बनाये जा रहे हैं जिस के तहत प्रशिक्षण अनिवार्य किया जायेगा। एआईसीटीई से करीब दस हज़ार शिक्षण संस्थान मान्यता प्राप्त है और इन सभी संस्थानों के शिक्षकों को प्रशिक्षित करने के लिए भारतीय विज्ञान संस्थान बेंगलुरु से जुड़े एवं विश्वेश्वरैया तकनीकी विश्विद्यालय के पूर्व कुलपति ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। उसके आधार पर प्रशिक्षण के लिए पाठ्यक्रम बनेगा और शिक्षक भोपाल, चंडीगढ़, चेन्नई तथा कोलकाता स्थित राष्ट्रीय तकनीकी शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान में प्रशिक्षण लेंगे। इसके अलावा वे मानव संसाधन विकास मंत्रालय के स्वयं प्लेटफोर्म से भी इंटरनेट पर प्रशिक्षण ले सकेंगे।

उन्होंने बताया कि आईआईटी की तरह एआईसीटीई के संस्थानों में भी छात्रों के दाखिले से पूर्व विशेष शिविर लगाये जायेंगे जिनमें छात्र अपने शिक्षकों और सहयोगी छात्रों से परिचित होंगे तथा एक-दूसरे से संवाद करेंगे। साथ ही उन्हें फिल्म आदि दिखायी जायेंगी। इस शिविर में 25 छात्रों का एक बैच होगा और एक शिक्षक होगा। इसमें वे अपनी भाषाई झिझक को भी दूर करेंगे तथा अंग्रेज़ी आदि भी सीखेंगे ताकि दाखिले के बाद उन्हें भाषा को लेकर कोई समस्या नहीं हो सके। उन्होंने यह भी बताया कि तकनीकी संस्थानों में अब तक करीब 500 स्टार्टअप शुरू हो गए हैं तथा भविष्य में इनकी संख्या धीरे-धीरे और बढ़ेगी। इन तकनीकी संस्थाओं ने अभी तक एक हज़ार गांवों को गोद भी लिया है। 

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