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हॉलीवुड जाने वाले पहले अभिनेता थे शशि कपूर, पढ़ें- उनके बारे में कुछ रोचक बातें

Publish Date: December 04 2017 06:57:53pm

मुंबई (उत्तम हिन्दू न्यूज) : शशि कपूर का जन्म 18 मार्च 1938 को कलकत्ता में हुआ था। परिवार ने उनका नाम नाम बलबीर राज कपूर रखा और सभी प्यार से उन्हें शशि बुलाते थे। बाद में शशि कपूर नाम से ही वह फिल्मों में आए। शशि कपूर खानदान में अपने भाइयों में सबसे छोटे हैं। इसलिए उन्हें शशि बाबा भी कहा जाता था। उनके बड़े भाई शम्मी कपूर, शशि को शाशा पुकारते थे। आज हम आपको शशि कपूर के बारे में ऐसी बातें बताने जा रहे हैं, जो आप शायद ही जानते हों... 

* पिता और भाइयों की फिल्मों में रूचि को देखते हुए शशि ने भी अभिनेता बनने की ठानी। इसके बाद उनके पिता पृथ्वीराज कपूर ने शशि को खुद अपना सफर तय करने की बात कही। 

* अपने भाइयों में शशि कपूर को सबसे हैंडसम माना जाता है। लड़कियां और महिलाएं शशि की दीवानी थी। 

* शशि ने बचपन से ही फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया। बाल कलाकार कलाकार के रूप में शशि ने आग (1948), आवारा (1951) जैसी हिट फिल्मों में काम किया। 
 
* बॉलीवुड में बतौर हीरो शशि ने अपना करियर 1961 में आई फिल्म धर्मपुत्र से शुरू किया। यश चोपड़ा द्वारा निर्देशित यह फिल्म 'आचार्य चतुरसेन' नामक उपन्यास पर आधारित थी। फिल्म को काफी पसंद किया गया और इसे प्रेसिडेंट सिल्वर मेडल से नवाजा गया। 

* जिस वक्त शशि एक हीरो के तौर पर अपना करियर शुरू किया, तब उनके भाई राज कपूर और शम्मी कपूर के सितारे बुलंदियों पर थे। इन दोनों के बाद फिल्म निर्माताओं की तीसरी पसंद शशि कपूर बन गए।  Image result for shashi kapoor jab jab phool khile 
* फिल्म 'जब जब फूल खिले' (1965) आने के बाद शशि कपूर शोहरत की बुलंदियों पर पहुंच गए। बेहतरीन संगीत, रोमांटिक कहानी और शशि कपूर-नंदा की जोड़ी ने सभी के दिल को छू लिया। 

* इस फिल्म में अपनी भूमिका की तैयारी के लिए शशि ने कश्मीर में कुछ दिन नाविकों के साथ बिताए ताकि उनकी जीवनशैली से परिचित हो सके। इस दौरान उनका खाना-पीना भी नाविकों के साथ ही होता था।  

* शशि कपूर की पसंदीदा अभिनेत्री नंदा थी। इसकी एक वजह ये भी थी कि जिस वक्त नंदा ने शशि के साथ काम करने के लिए हामी भरी उस वक्त वे बड़ी स्टार थीं, लेकिन इस बावदूज उन्होंने शशि के साथ काम करने के लिए हां की, इसलिए शशि हमेशा नंदा के अहसानमंद रहे। 

* इन दोनों की जोड़ी को दर्शकों ने भी खूब पसंद किया। दोनों ने चार दीवारी (1961), मेहंदी लगी मेरे हाथ (1962), मोहब्बत इसको कहते हैं (1965), जब जब फूल खिले (1965), नींद हमारी ख्वाब तुम्हारे (1966, राजा साब (1969) तथा रूठा ना करो (1970) जैसी फिल्मों में काम किया। 
 
* नंदा के अलावा शशि कपूर ने राखी, जीनत अमान और शर्मिला टैगोर के साथ भी कई फिल्में की। 
 
* हालांकि शशि कपूर को कभी बॉलीवुड के टॉप स्टारों में तो नहीं गिना गया, लेकिन राज कपूर, शम्मी कपूर, राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन जैसे सुपर-स्टारों के बीच उन्होंने अपना एक अलग मुकाम हासिल किया। 
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* शशि कपूर इतने व्यस्त अभिनेता बन गए थे कि दिन में तीन से चार फिल्मों की शूटिंग करते थे। अपने भाई राज कपूर को 'सत्यम शिवम सुन्दरम' के लिए वक्त नहीं दे पाते थे। राज साहब ने नाराज होकर उन्हें 'टैक्सी' कह दिया था क्योंकि शशि का मीटर हमेशा डाउन रहता था। 

* मल्टीस्टारर फिल्मों से शशि कपूर को कभी परहेज नहीं रहा। अपने दौर के सारे समकालीन अभिनेताओं के साथ उन्होंने काम किया। लेकिन अमिताभ बच्चन और शशि कपूर की जोड़ी को दर्शकों ने बेहद पसंद किया। दीवार, सुहाग, कभी कभी, सिलसिला, नमक हलाल जैसी सफल फिल्में दोनों ने मिलकर दी। 

* शशि कपूर उन शुरुआती भारतीय अभिनेताओं में से हैं जिन्होंने ब्रिटिश और अमेरिकन फिल्मों में काम किया। द हाउसहोल्डर (1963), शेक्सपीअर वाला (1965), बॉम्बे टॉकीज (1970), हीट एंड डस्ट (1982), जैसी उनकी फिल्में काफी चर्चित रहीं। 
 
* सिद्धार्थ (1972) नामक फिल्म के कारण शशि कपूर सुर्खियों में रहे। इस फिल्म में वे न्यूड सिमी ग्रेवाल के सामने खड़े नजर आए जिसको लेकर काफी हंगामा हुआ।

* कमर्शियल फिल्मों से कमाया पैसा शशि कपूर ने फिल्मों में ही लगाया। उन्होंने पृथ्वी थिएटर स्थापित किया जिसके जरिये कई प्रतिभाएं सामने आईं।
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*  कलकत्ता में शशि कपूर की मुलाकात जेनिफर कैंडल से हुई जो जल्दी ही मोहब्बत में बदल गई। दोनों शादी करना चाहते थे, लेकिन कैंडल परिवार इसके खिलाफ था। शम्मी कपूर की पत्नी गीता बाली ने शशि का पुरजोर समर्थन किया और उनके प्रयासों से यह शादी संभव हुई। 
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* शशि कपूर ने सार्थक फिल्में बनाईं। उनके बैनर तले बनी जुनून (1978), कलयुग (1980), 36 चौरंगी लेन (1981), विजेता (1982), उत्सव (1984) आज भी याद की जाती हैं। हालांकि इन फिल्मों के निर्माण में उन्हें तगड़ा घाटा उठाना पड़ा।  घाटे से उबरने के लिए शशि ने कमर्शियल फिल्म बनाने का निश्चय किया। अपने दोस्त अमिताभ बच्चन को लेकर उन्होंने 'अजूबा' (1991) फिल्म निर्देशित की, लेकिन इस फिल्म की असफलता ने उनका घाटा और बढ़ा दिया। बाद में कुछ संपत्ति बेचकर उन्होंने अपना कर्ज चुकता किया। 
 
* शशि कपूर को तीन बार नेशनल अवॉर्ड मिल चुका है। 1979 में शशि द्वारा निर्मित फिल्म जुनून को बेस्ट फीचर फिल्म अवॉर्ड मिला। 1986 में फिल्म न्यू देल्ही टाइम्स के लिए बेस्टर एक्टर का नेशनल अवॉर्ड मिला। 1994 में फिल्म 'मुहाफिज' के लिए स्पेशल ज्युरी अवॉर्ड। साथ ही उन्हें 2014 का दादासाहेब फालके अवॉर्ड भी देने की घोषणा हुई। सोमवार शाम (4 दिसंबर) को शशि हमारे बीच नहीं रहे। लंबी बीमारी के बाद मुंबई में उनका निधन हो गया। लेकिन उनके मुस्कुराते चेहरे और फिल्मी जगत में उनके अभूतपूर्व योगदान को हमेशा याद किया जाएगा।
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