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वैश्विक राजनीतिक नेतृत्व को अधिक मजबूत होने की जरूरत

Publish Date: December 04 2017 09:29:01pm

नैरोबी (उत्तम हिन्दू न्यूज): संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण ने सोमवार को एक रपट में कहा कि वैश्विक राजनीतिक नेतृत्व और साझेदारी को सभी स्तरों पर सामंजस्य के साथ कार्य करने की आवश्यकता है। रपट में कहा गया है कि जीवनशैली में बदलाव, कम कार्बन प्रौद्योगिकी निवेश और बार-बार का आग्रह इस पृथ्वी को प्रदूषण मुक्त बनाने की दिशा में एक कदम है। 
वायु प्रदूषण से निपटने के लिए नए तरीकों समेत, एक दर्जन से अधिक संकल्पों के साथ तीन दिवसीय तीसरी संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सभा सोमवार को यहां शुरू हुई। वायु प्रदूषण से हर साल 65 लाख लोग मारे जाते हैं। अध्ययन से पता चला है कि 80 प्रतिशत से अधिक शहरों में वायु की गुणवत्ता संयुक्त राष्ट्र स्वास्थ्य मानकों के अनुकूल नहीं है। संयुक्त राष्ट्र की नई पर्यावरण रपट का शीर्षक कार्यकारी निदेशक की रपट, एक प्रदूषण मुक्त पृथ्वी की दिशा में है।

बैठक में समस्याओं को परिभाषित करने और नए कार्य क्षेत्रों को तैयार करने के लिए रपट को आधार के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। साथ ही रपट में सबसे खराब प्रदूषण के सभी स्तरों और कार्यों पर राजनीतिक नेतृत्व और साझेदारी की सिफारिश की गई है। 

रपट में जीवनशैली में बदलाव, निम्न कार्बन प्रौद्योगिकी निवेश और एडवोकेसी का भी समर्थन किया गया है।

ये सिफारिशें हवा, भूमि, ताजा पानी, समुद्री, रासायनिक और अपशिष्ट प्रदूषण समेत सभी प्रकार के प्रदूषणों के विश्लेषण पर आधारित हैं।

रपट में कहा गया है कि दुनिया में प्रत्येक चार मौतों में से लगभग एक मौत पर्यावरण क्षरण के कारण होती है, या साल में 1.26 करोड़ लोग पर्यावरण क्षरण के कारण मारे जाते हैं।

रपट में जो सबसे बड़ी बात उजागर हुई हैं, वह यह कि प्रदूषण के कारण सालाना 600,000 बच्चों का मस्तिष्क क्षतिग्रस्त हो जाता है। साथ ही जल और मिट्टी प्रदूषण पर भी खास ध्यान देने की जरूरत है। सागरों में पहले से ही 500 मृत क्षेत्र हैं, जहां समुद्री जीवों की जिंदगियों को समर्थन देने के लिए बहुत ही कम ऑक्सीजन होती है। 

जिंदगी के कड़वे सच को प्रदर्शित करती रपट में कहा गया है कि विश्व के अपशिष्ट जल का 80 प्रतिशत हिस्सा बिना शुद्ध किए पर्यावरण में मिल जाता है, जो खेतों व झीलों और नदियों के पानी को जहरीला बनाता है। नदियां 30 करोड़ लोगों को पेयजल मुहैया कराती हैं।

प्रदूषण के वैश्विक खतरे से निपटने के लिए इस सम्मेलन में राराष्ट्राध्यक्ष, मंत्री, व्यापार जगत के दिग्गज, संयुक्त राष्ट्र के अधिकारी और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों समेत 4,000 से अधिक लोग हिस्सा ले रहे हैं।

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