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GST का डेटा पकड़ेगा इनकम टैक्स की चोरी

Publish Date: December 06 2017 12:15:36pm

नई दिल्ली (उत्तम हिन्दू न्यूज) : सरकार गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स फाइलिंग्स से हासिल डेटा के जरिए उनलोगों को ट्रैक कर सकती है, जो इनकम टैक्स देने से बच रहे हैं। सरकार एक मैकेनिज्म बना रही है, इसके तहत जीएसटी रिपोर्टिंग से हासिल डेटा का मिलान इनकम टैक्स फाइलिंग्स से किया जा सकता है। हालांकि यह प्रॉजेक्ट अभी शुरुआती चरण में है, लेकिन इसके लागू होते ही लोग इनकम टैक्स की चोरी नहीं कर सकेंगे। दरअसल सरकार ऐसा डेटाबेस बनवा रही है, जिसके जरिए कंपनियों और उनके प्रमोटरों की इनकम का मिलान फाइल किए गए टैक्स रिटर्न से किया जा सके। 

अभी यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार इस डेटा का इस्तेमाल पिछले वर्षों में की गई टैक्स चोरी का पता लगाने में करेगी या इसका उपयोग भविष्य में टैक्स स्क्रूटिनी के लिए ही होगा। पहले वाले टैक्स सिस्टम के विपरीत जीएसटी सिस्टम में कंपनियों और बड़े कारोबारियों के लेनदेन का पता लगाया जा सकता है और इसमें इनकम को घटाकर या खर्च बढ़ाकर दिखाना मुश्किल है। 

इंडस्ट्री पर नजर रखने वालों के मुताबिक टैक्स अधिकारियों को तमाम डेटा खंगालने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि बिग डेटा ऐनालिटिक्स से यह काम हो सकता है। डेलॉयट इंडिया में पार्टनर (टैक्स टेक्नॉलजी ऐंड ऐनालिटिक्स) जसकिरन भाटिया ने कहा कि तकनीकी तौर पर जीएसटी डेटा के जरिए इनकम टैक्स डेटा से लिंक बनाया जा सकता है। ऐसा ऐनालिटिक्स की मदद से कॉमन डेटा सेट के जरिए किया जा सकता है। जीएसटीएन और टैक्स डिपार्टमेंट के पास यह रिस्क ऐनालिसिस करने के लिए पहले से डेटा है कि टैक्स पेमेंट्स के मामले में इंडस्ट्री ऐवरेज से ज्यादा अंतर वाले मामलों की स्क्रूटिनी की जा सके और जो टैक्स न दे रहे हों या कंपनी की आमदनी को घटाकर दिखा रहे हों, उनसे सवाल-जवाब किया जा सके।

इसको फार्मा इंडस्ट्री में इस्तेमाल होनेवाला एक स्पेशलाइज्ड केमिकल बनानेवाली यूनिट के उदाहरण से इसे समझना आसान है। मसलन कंपनी के प्रमोटरों का टर्नओवर पिछले कुछ वर्षों में करीब 30 करोड़ रुपये सालाना का है, लेकिन वे केवल 4 करोड़ के लिए कॉर्पोरेट टैक्स चुका रहे थे। यही नहीं प्रमोटर अपनी इनकम भी कम बता रहे थे और इस तरह इनकम टैक्स से बच रहे थे। 

इस प्रमोटर फैमिली को सलाह देनेवाले टैक्स अडवाइजर ने कहा, ऐसी हेरफेर अब मुश्किल हो गई है। पहले खरीदे गए रॉ मटीरियल्स और सप्लाई किए गए माल का कोई रिकॉर्ड नहीं होता था। अब इसमें छेड़छाड़ नहीं हो सकती। इससे कंपनी की आमदनी में अचानक उछाल आया। इसके अलावा प्रमोटर सबसे ऊंचे इनकम टैक्स बैंड से अपनी आमदनी काफी कम दिखाने के लिए दूसरी ट्रिक्स भी आजमाते थे।
 

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