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अब समय आ गया है धारा 370 हटाने का

Publish Date: December 06 2017 12:22:36pm

वैसे देखा जाए तो हम अतीत को भूल जाते हैं और वर्तमान को याद रखते हैं। ससंद के दोनों सदनों में 22 फरवरी 1994 को ध्वनिमत से एक प्रस्ताव पारित किया गया था, उस प्रस्ताव में भारत ने पीओके (पाक अधिकृत कश्मीर) पर अपना सीधा हक जताते हुए कहा था कि यह भारत का अटूट अंग है। इस प्रस्ताव को संसद में ध्वनिमत से पारित किया गया था, लेकिन क्या प्रस्ताव पारित करना काफी था।

आज इस प्रस्ताव को पास किये, 24 साल हो गए, आज भी हम वहीं खड़े हैं, जहां कल खड़े थे, एक इंच भी आगे नहीं बढ़े। इतने सालों से जिस कश्मीर को हम अपना कश्मीर मान रहे हैं, उनमें कुछ कश्मीर वाले भी भारत मुर्दाबाद के नारे लगा रहे हैं। पाकिस्तान जिंदाबाद कर रहे हैं। पीओके अधिकृत कश्मीर के आतंकवादियों को पनाह देकर उन्हें बिरयानी खिला रहे हैं। हमारे सैनिकों पर पत्थर बरसा रहे हैं। वे आतंकवादियों की कठपुतली बने हुए हैं, फिर भी हम सोए पड़े हैं। कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है तब भी हम बयानबाजी कर रहे है। हमारे सैनिकों के  सिर काटकर फेंक देते हैं, तब भी हम बयानबाजी कर लेते हैं। ध्वनिमत से प्रस्ताव पास करने से कुछ नहीं होगा। इन 24 वर्षों में पाक अधिकृत कश्मीर को कभी मिलाने की कोशिश नहीं की गई। 

दरअसल कश्मीर पर भी राजनीति चल रही है। सब कूटनीति असफल होती जा रही है। पाकिस्तान अपनी नीच हरकतें समय-समय पर करता रहा है। यदि कश्मीर हेतु सारे पार्टी वाले एकमत हो जाएंगे, तब मानिये पाकिस्तान अपने दड़बे में घुस जायेगा। आजादी के 70 साल गुजर गये, अब कश्मीर के हालात बेकाबू हो गये है। भारत सरकार भी करोड़ों रुपये कश्मीर पर खर्च करती है मगर वही ढाक के तीन पात। आज कश्मीर को अलगाववादी बनाने में धारा 370 का बहुत बड़ा हाथ रहा। 26 अक्टूबर 1947 को जिन परिस्थितियों में इस धारा को अस्थायी रूप से लागू किया। इसे भारत का संविधान बनने के बाद खत्म कर देना चाहिए था। मगर इसे शेख अब्दुल्ला के कहने पर लटकाए रखा। आज यह देश के लिए कोढ़ बन चुकी है। आज भारतीय जनता पार्टी को संसद में बहुमत जरूर मिला है। मगर राज्य सभा में उसका बहुमत नहीं है। जिस तरह भारतीय जनता पार्टी ने जीएसटी विधेयक राज्यसभा में पास करवा लिया तो क्या वो धारा 370 को खत्म नहीं करवा सकती, क्यों? सभी पार्टी वाले जानते हैं कि धारा 370  के कारण कश्मीर में अलगाववाद तेजी से पनप रहा है। मगर इसे खत्म करने की पहल कोई इसलिए नहीं कर रहा है कि इससे उसका वोट बैंक खिसक न जाए। तीन लाख कश्मीरी पंडितों को निकाल दिया गया। सभी पार्टी वाले विशेषकर कांग्रेस वाले कुछ नहीं बोले- क्योंकि जन्मू-कश्मीर के मुसलमान उनका वोट बैंक हैं। 

राजा हरिसिंह ने धारा 370 को अस्थायी बताकर कश्मीर की रियासत का भारत में विलय किया था। वो उस समय की मजबूरी रही होगी। मगर इन 70 सालों में कश्मीर कितना बदल चुका है। 

वही धारा 370 एक मजबूत दीवार बनकर खड़ी है। आज भी कश्मीर देश का हिस्सा है। मगर एक ही देश में दो-दो कानून चलते हैं। कश्मीर में भारत के किसी भी प्रांत का आदमी स्थायी रूप से नहीं बस सकता है। वहां जमीन नहीं खरीद सकता है। छह साल में वहां चुनाव होते हैं। यह कैसा संविधान है जहां एक ही देश में दो-दो संविधान चलते हैं। यही कारण है कि कश्मीर के अलगाववादियों के हौसले बुलंद हंै।

आज कश्मीर को हम भारत का अंग जरूर मान रहे हैं पर पाकिस्तान आंतकवादियों को भेजकर नंगा नृत्य कर रहा हैं। और तो और कश्मीर के कुछ लोग भी नंगा नृत्य कर रहे हैं, फिर भी हमारे देश के किसी भी पार्टी ने नेता को यह समझ में नहीं आ रहा है। बल्कि कई लोग तो 370 धारा को गले में लटाकाकर इसकी जय बोल रहे हैं। कश्मीर कभी भारत का स्वर्ग था, वह अब नरक बनता जा रहा है। आये दिन पाकिस्तान हमला करता है। हम मुंहतोड़ जवाब देंगे, बयान देकर राजनीति करके आपस में लड़कर खामोश हो जाते हैं। कश्मीर के कुछ लोग हमारी पुलिस व सेना पर पत्थर फैंक रहे हंै। यह किसी पार्टी के नेता को नहीं दिखाई दे रहा है, बल्कि इस घटना पर राजनैतिक रोटियां सेंक रहे हैं।               

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