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डेंगू से बच्ची की मौत का मामला : हरियाणा सरकार फोर्टिस के खिलाफ करेगी एफआईआर दर्ज : अनिल विज

Publish Date: December 06 2017 07:54:35pm

चंडीगढ़(मोहन अरविंद) : गुरुग्राम के फोर्टिस अस्पताल में  डेंगू पीडि़़त 7 वर्षीय बच्ची के इलाज का बिल 15.59 लाख रुपए परिजनों को थमाने व बच्ची की मौत के मामले में अस्पताल प्रबंधन को दोषी पाया गया है। इलाज में चिकित्सीय लापरवाही के लिए अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। जबकि अस्पताल के ब्लड बैंक का लाइसेंस रद्द करने के लिए भी उसे नोटिस दिया जा चुका है।
 हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने बुधवार को चंडीगढ़ में जानकारी देते हुए कहा कि जांच में इस बात की भी पुष्टि हुई है कि अस्पताल प्रबंधन ने इलाज के लिए बच्ची के परिजनों से अत्यधिक राशि वसूल की। एक ब्लड यूनिट जिसकी दर 400 रुपए है, उसके लिए कई यूनिटों का शुल्क 2000 रुपए तक वसूल किया गया। इसी तरह अस्पताल में 499 रुपए वाला इंजेक्शन उपलब्ध होते हुए भी बच्ची को 3000-3200 रुपए तक की कीमत वाले महंगे इंजेक्शन लगाए गए। माना कि 7 साल की मासूम बच्ची के मामले में अस्पताल प्रबंधन ने जिस तरह की लापरवाही बरती है, वह देसी भाषा में हत्या करने के समान है। इस मामले में कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पूरे प्रकरण की जांच छह सदस्यीय कमेटी ने की है।
उल्लेखनीय है कि यह मामला पिछले दिनों सामने आने के बाद राज्य सरकार ने जांच के लिए एक कमेटी बनाई थी। 
विज ने मीडिया को बताया कि जब भी किसी प्राइवेट अस्पताल में डेंगू का कोई केस रिपोर्ट होता है तो उसकी जानकारी संबंधित जिले के सीएमओ को दिया जाना जरूरी है। लेकिन फोर्टिस अस्पताल की ओर से स्थानीय सीएमओ को इसकी जानकारी नहीं दी गई।
जांच कमेटी ने माना है कि अस्पताल प्रबंधन ने तय प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों ने बच्ची को गंभीर स्थिति में भी बिना प्रोटोकॉल का पालन किए आईसीयू से एंबूलेंस में शिफ्ट किया। बच्ची के परिजनों को तो इस बारे में जानकारी नहीं थी, लेकिन डॉक्टर तो जानते थे कि लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाते ही बच्ची की मृत्यु हो सकती है। इसके लिए संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई के लिए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) को भी लिखा जाएगा।
जांच कमेटी ने यह भी माना है कि अस्पताल प्रबंधन ने एनएबीएच एक्रिडेशन के नियमों का भी पालन नहीं किया। इसके लिए एनएबीएच को इस अस्पताल के एक्रिडेशन पर पुनर्विचार करने के लिए भी लिखा जा रहा है।
विज ने बताया जांच कमेटी ने माना है कि फोर्टिस अस्पताल प्रबंधन ने दवाओं में भी भारी मुनाफा कमाया है। जैनरिक दवाएं होते हुए भी बच्ची के इलाज में ब्रांडेड दवाएं काम ली गईं। कई दवाएं ऐसी उपयोग हुई हैं, जिनमें 108 फीसदी तक का मुनाफा कमाया गया। जबकि कुछ दवाओं में तो 1737 प्रतिशत तक का मुनाफा लिया गया है।
जांच कमेटी के सामने बच्ची के परिजनों ने आरोप लगाया है कि अस्पताल प्रबंधन ने कुछ सहमति पत्रों पर उनके फर्जी हस्ताक्षर कर रखे हैं। जबकि उनकी ओऱ से केवल एक या दो सहमति पत्रों पर ही दस्तखत किए गए थे।

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