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ब्याज दरें यथावत रखने पर कॉरपोरेट जगत, निवेशक निराशा

Publish Date: December 06 2017 08:09:59pm

नई दिल्ली/मुंबई (उत्तम हिन्दू न्यूज): भारतीय कॉरपोरेट जगत और निवेशकों ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा वित्त वर्ष 2017-18 की पांचवी मौद्रिक नीति समीक्षा में बुधवार को प्रमुख ब्याज दरों को यथावत रखने के फैसले पर निराशा जाहिर की है। फिक्की के अध्यक्ष पंकज पटेल ने कहा, "आरबीआई द्वारा ब्याज दरों को मौजूदा दरों पर बनाए रखने के फैसले से फिक्की को निराशा हुई है। दरों में कटौती से कारोबारियों और निवेशकों का मनोबल बढ़ता तथा विकास दर की गति को बढ़ावा मिलता, जो दूसरी तिमाही में जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) के आंकड़ों में देखने को मिला है। उन्होंने कहा, अर्थव्यवस्था में तेजी के प्रारंभिक संकेतों के बाद उसे और आगे बढ़ाने के लिए सभी किस्म के समर्थन की जरूरत होती है, जोकि नौकरियों के परिप्रेक्ष्य से महत्वपूर्ण है। नीतिगत दरों में कटौती से आवास ऋण को बढ़ावा मिलता, जिससे आर्थिक सुधार प्रक्रिया में बढ़ावा देने की सरकार की कोशिशों को समर्थन मिलता।"

उद्योग मंडल सीआईआई ने कहा कि ब्याज दरों में कटौती से विकास को बढ़ावा मिलता। 

सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा, हमें उम्मीद है कि आरबीआई आगे ब्याज दरों में कटौती करेगा, जिससे घरेलू मांग में तेजी आएगी, और व्यापक निवेश गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। जो अभी बड़े पैमाने पर नहीं हो पा रहा है।
एसोचैम के मुताबिक, आरबीआई ने अपने फैसले में मुद्रास्फीति पर जोर दिया है, लेकिन विकास की चिंता को अलग नहीं किया जा सकता, क्योंकि पूंजी की लागत भारत में अभी भी ऊंची है। 

एसोचैम के अध्यक्ष संदीप जाजोदिया ने एक बयान में कहा, भारतीय कॉरपोरेट जगत अभी भी कर्ज के बोझ तले दबा है, जबकि उपभोक्ता मांग में तेजी नहीं आ रही। ब्याज दरों में नरमी ही इन दोनों मुद्दों का समाधान है। जहां तक महंगाई का सवाल है, तो आरबीआई की चिंता जायज है। इस पर सरकार की तरफ से कदम उठाने की जरूरत है और आपूर्ति पक्ष को ठीक करने की जरूरत है, खासतौर से आम आदमी के इस्तेमाल की चीजों को लेकर।

उन्होंने कहा, कृषि क्षेत्र की समूची मूल्य श्रृंखला की अक्षमताओं को दूर करना समय की जरूरत है, ताकि उत्पादक और ग्राहक दोनों को मंहगाई को प्रभावित किए बिना उचित सौदा प्राप्त हो। जहां तक विकास दर के पटरी पर लौटने का सवाल है, ब्याज दरों के अलावा तरलता में कमी की स्थिति पर भी ध्यान देने की जरूरत है। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि जब विकास दर में तेजी का रूख हो, तो उस समय उद्योग, व्यापार और ग्राहक को समुचित ऋण उपलब्ध हो।"

पांचवी मौद्रिक नीति समीक्षा पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए आईसीआईसीआई बैंक की प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी चंदा कोचर ने कहा, आरबीआई द्वारा ब्याज दरों को यथावत रखने का फैसला मुद्रास्फीति के परिप्रेक्ष्य को देखते हुए उम्मीदों के अनुरूप है। बैंक ने पुनर्पूंजीकरण सहित सरकार द्वारा लागू विभिन्न संरचनात्मक सुधारों के अलावा विकास की संभावनाओं को देखते हुए यह फैसला किया है।

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